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सहरसा में निगरानी का बड़ा एक्शन, रिश्वत लेते राजस्व कर्मचारी और दलाल गिरफ्तार

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सहरसा के महिषी अंचल कार्यालय में विशेष निगरानी इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व कर्मचारी और कथित दलाल को 16 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। जमीन की रसीद काटने के बदले मांगी जा रही थी घूस

सहरसा/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच सहरसा जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां विशेष निगरानी इकाई ने महिषी अंचल कार्यालय में छापेमारी कर राजस्व कर्मचारी और उसके कथित दलाल को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। जमीन से जुड़े काम के बदले घूस लेने की शिकायत पर पटना से पहुंची टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को नकद रकम के साथ दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद जिले के सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला जमीन की रसीद काटने से जुड़ा हुआ था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राजस्व कर्मचारी द्वारा काम करने के बदले पैसे की मांग की जा रही थी और रिश्वत नहीं देने पर फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विशेष निगरानी इकाई ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की और आरोपों की पुष्टि होने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता मुहम्मद हयात ने निगरानी विभाग को लिखित आवेदन देकर बताया था कि महिषी अंचल कार्यालय में जमीन से संबंधित जरूरी कार्य के लिए उनसे घूस मांगी जा रही है। आरोप था कि बिना पैसे दिए रसीद काटने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही थी। शिकायत को गंभीर मानते हुए निगरानी विभाग ने पहले पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच में रिश्वत मांगने की बात सही पाए जाने के बाद विशेष टीम गठित की गई।

इसके बाद पटना से पहुंची विशेष निगरानी इकाई की टीम ने महिषी अंचल कार्यालय और उससे जुड़े स्थानों पर निगरानी शुरू कर दी। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर भेजा गया। जैसे ही पैसे का लेनदेन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राजस्व कर्मचारी श्याम प्रसाद सिंह और उसके कथित दलाल फुलचंद साह को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने दोनों के पास से रिश्वत की राशि भी बरामद की है।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। अचानक निगरानी टीम के पहुंचने से वहां मौजूद कर्मचारी और आम लोग भी हैरान रह गए। कई लोग मौके पर जुट गए और कार्रवाई को देखने लगे। निगरानी अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद उनसे पूछताछ शुरू कर दी। माना जा रहा है कि जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

विशेष निगरानी इकाई के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस तरह की वसूली लंबे समय से तो नहीं की जा रही थी।

विशेष निगरानी इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी जांच की गई और सबूत मिलने के बाद छापेमारी की गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्हें गुरुवार को निगरानी न्यायालय, पटना में पेश किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को अक्सर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई बार कथित तौर पर कर्मचारियों एवं बिचौलियों द्वारा पैसे की मांग की जाती है। ऐसे मामलों में गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि निगरानी विभाग लगातार ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर रहा है।

बिहार में पिछले कुछ महीनों के दौरान निगरानी विभाग ने कई सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इसके बावजूद घूसखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से आम जनता में भरोसा बढ़ता है और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच डर का माहौल बनता है। लोगों ने उम्मीद जताई कि सरकार और निगरानी विभाग भविष्य में भी इसी तरह सक्रिय रहकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का काम करेंगे। वहीं इस घटना के बाद महिषी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली भी चर्चा में आ गई है।

सरकारी सूत्रों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। हालांकि जमीन और राजस्व से जुड़े कई मामलों में अब भी लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसका फायदा कुछ कर्मचारी और बिचौलिए उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में निगरानी की यह कार्रवाई आम लोगों के लिए राहत और चेतावनी दोनों मानी जा रही है।

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